1. मासिक उपवास क्या है? – एक पुरानी परंपरा, नई ज़रूरत
बचपन में जब दादी उपवास करती थीं, तो हम सोचते थे कि ये सिर्फ पूजा-पाठ या धार्मिक वजहों से होता है। लेकिन जैसे-जैसे ज़िंदगी की तेज़ रफ्तार ने हमें थकाया, अब समझ आता है कि वो उपवास सिर्फ भगवान के लिए नहीं, अपने शरीर और मन के लिए भी था।
मासिक उपवास यानी हर महीने एक या दो दिन शरीर को थोड़ा विराम देना। कुछ न खाकर नहीं, बल्कि हल्का, पचने वाला, नेचुरल भोजन लेकर अपने digestive system को राहत देना।
2. शरीर को क्यों चाहिए ‘ब्रेक’?
सोचिए – आपकी बाइक या कार लगातार चले तो एक समय बाद गर्म हो जाती है। उसे ठंडा करना पड़ता है, सर्विसिंग करनी पड़ती है। ठीक वैसे ही हमारा शरीर भी एक मशीन है। लगातार खाने, पचाने, काम करने से थक जाता है।
मासिक उपवास शरीर को वही “ठंडा ब्रेक” देता है – ताकि पाचन तंत्र आराम करे, शरीर डिटॉक्स हो और अंदर से नई ऊर्जा जगे।
3. उपवास से क्या फायदे होते हैं? – जानिए वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण
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✅ पाचन तंत्र को आराम:
जब हम उपवास करते हैं, तो शरीर खाने को पचाने में नहीं, रिपेयर करने में लग जाता है। -
✅ डिटॉक्सिफिकेशन:
उपवास के दौरान शरीर खुद ही जमा हुए विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। -
✅ इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है:
मासिक उपवास से ब्लड शुगर नियंत्रण में आता है, जिससे डायबिटीज़ की संभावना घटती है। -
✅ मानसिक स्पष्टता:
उपवास के दौरान दिमाग हल्का और शांत महसूस करता है। एक तरह से माइंड क्लियरिंग थैरेपी है ये। -
✅ वज़न नियंत्रण:
नियमित रूप से मासिक उपवास करने से मेटाबॉलिज्म संतुलित रहता है और वजन कंट्रोल में आता है।
4. मासिक उपवास कैसे करें? – आसान गाइड
🍵 1. उपवास का दिन चुनें:
हर महीने कोई एक दिन चुनें – एकादशी, पूर्णिमा या कोई भी दिन जो आपको मानसिक रूप से शांत रखे।
🥗 2. खाने में क्या लें:
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फल (पपीता, सेब, केला)
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नारियल पानी
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नींबू-शहद पानी
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भुना हुआ मखाना या मूंगफली
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सादी खिचड़ी या साबूदाने की खिचड़ी (यदि बिल्कुल भूख लगे)
🚫 3. क्या न खाएं:
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भारी, तला-भुना खाना
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चीनी और मैदा से बनी चीज़ें
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कैफीन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
🧘♂️ 4. ध्यान और सांसों पर ध्यान दें:
उपवास के साथ-साथ थोड़ा ध्यान और प्राणायाम जोड़ें – इससे लाभ कई गुना बढ़ जाता है।
5. मासिक उपवास और आज का जीवन – क्या ये व्यस्त लोगों के लिए संभव है?
हाँ, बिल्कुल।
अगर आप ऑफिस जाते हैं, घर का काम करते हैं, या पढ़ाई में व्यस्त हैं – तब भी आप मासिक उपवास को अपने तरीके से अपना सकते हैं।
👉 पूरा उपवास न सही, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे 16:8 पैटर्न अपनाएं – यानी 16 घंटे उपवास और 8 घंटे भोजन।
👉 या फिर दिन में सिर्फ हल्का फलाहार लेकर शरीर को आराम दें।
6. एक सच्चा अनुभव – उपवास से कैसे बदली ज़िंदगी
“मैं हर महीने एक दिन सिर्फ फल और नारियल पानी लेता हूँ। पहले दिन थोड़ा कठिन लगा, लेकिन तीसरे महीने से शरीर खुद उस दिन को पहचानने लगा – जैसे उसे भी उस छुट्टी की आदत लग गई हो। पेट हल्का, मन शांत और ऊर्जा दुगनी!”
– अनुराग, 42 वर्ष, दिल्ली
7. धार्मिकता से स्वास्थ्य तक – उपवास का मूल भाव
भारतीय परंपराएं अक्सर सिर्फ आस्था नहीं, विज्ञान से जुड़ी होती हैं। एकादशी, संकष्ठी, प्रदोष – हर व्रत एक पाचन चक्र के अनुरूप होता है। आयुर्वेद भी कहता है – “उपवासो हि औषधम्” यानी उपवास अपने आप में एक दवा है।
8. उपवास करें, पर संतुलन के साथ
उपवास का मतलब खुद को सज़ा देना नहीं है। यह शरीर को प्यार देना है। ज़रूरी है कि:
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शरीर की सुनें
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अधिक पानी पिएं
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उपवास को दिखावा नहीं, भीतर की शांति से जोड़ें
9. आखिर में – चलिए एक दिन खुद को दें
हर महीने एक दिन अपने शरीर, मन और आत्मा को दें –
न कोई दिखावा, न कोई ज़बरदस्ती – सिर्फ एक सच्चा विराम।
“कभी-कभी ठहरना भी चलने का हिस्सा होता है।”
✅ Call to Action:
क्या आप भी मासिक उपवास करते हैं या करने की सोच रहे हैं?
नीचे कमेंट में बताइए – आपकी उपवास की आदत क्या कहती है?
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क्योंकि कभी-कभी एक पुरानी आदत, आज की सबसे बड़ी ज़रूरत बन जाती है।